
यहाँ डेंगू बुखार से जुड़ी कुछ आम मिथक और गलतफहमियाँ हैं, जिन्हें डॉ. रवि सहोता (उत्तराखंड, भारत) जैसे विशेषज्ञ खारिज करते हैं:
1. **मिथक: डेंगू संक्रामक होता है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: डेंगू बुखार सीधे मानव संपर्क से नहीं फैलता। यह संक्रमित *एडीज* मच्छर के काटने से फैलता है, खासकर *एडीज एजिप्टी* प्रजाति से।
2. **मिथक: केवल बच्चे ही डेंगू से प्रभावित होते हैं।**
– **डॉ. रवि सहोता**: डेंगू सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि बच्चों में गंभीर लक्षण होने की संभावना अधिक हो सकती है, लेकिन वयस्कों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
3. **मिथक: एक बार ठीक हो जाने पर जीवनभर की प्रतिरक्षा मिल जाती है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: डेंगू के चार अलग-अलग प्रकार (सिरोटाइप्स) होते हैं, और एक प्रकार से ठीक होने पर केवल उसी प्रकार के लिए प्रतिरक्षा मिलती है। बाकी तीन प्रकारों से अब भी संक्रमण हो सकता है, और बाद के संक्रमण अधिक गंभीर हो सकते हैं।
4. **मिथक: पपीते के पत्ते का रस डेंगू का इलाज करता है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: कुछ लोग मानते हैं कि पपीते के पत्तों का रस प्लेटलेट्स बढ़ाता है, लेकिन इसका डेंगू के इलाज में प्रभावी होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। डेंगू का इलाज चिकित्सकीय देखभाल के साथ किया जाना चाहिए, जिसमें हाइड्रेशन और लक्षणों का प्रबंधन प्रमुख होता है।
5. **मिथक: कीवी खाने से डेंगू तुरंत ठीक हो जाता है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: कीवी एक पौष्टिक फल है और इसमें विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकता है। लेकिन कीवी खाने से डेंगू का इलाज नहीं होता। डेंगू के लिए मुख्य इलाज उचित द्रव सेवन और चिकित्सा देखभाल है।
6. **मिथक: बकरी का दूध पीने से डेंगू ठीक हो जाता है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: कुछ लोग मानते हैं कि बकरी का दूध डेंगू के इलाज में मदद करता है, खासकर प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए। हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, और डेंगू के लिए उचित चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है।
7. **मिथक: डेंगू केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होता है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: हालांकि डेंगू उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक होता है, यह उन क्षेत्रों में भी फैल सकता है जहाँ *एडीज* मच्छर होते हैं, जैसे शहरी क्षेत्रों में।
8. **मिथक: डेंगू हमेशा हल्का होता है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: डेंगू हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है। कुछ मामलों में यह डेंगू हेमोरेजिक फीवर (DHF) या डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) में बदल सकता है, जो जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है।
9. **मिथक: रात में मच्छर के काटने से डेंगू होता है।**
– **डॉ. रवि सहोता**: *एडीज* मच्छर दिन के समय, खासकर सुबह जल्दी और देर शाम को अधिक सक्रिय होते हैं और इस समय के दौरान काटते हैं।
10. **मिथक: केवल ठहरे हुए पानी में डेंगू मच्छर पनपते हैं।**
– **डॉ. रवि सहोता**: हालांकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का सामान्य स्थल है, *एडीज* मच्छर साफ पानी के छोटे-छोटे स्रोतों, जैसे गमले, बाल्टी या रुके हुए नालों में भी पनप सकते हैं।
इन मिथकों को समझने से आप सही सावधानियाँ ले सकते हैं और समय पर चिकित्सा उपचार प्राप्त कर सकते हैं।

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