हरिद्वार
महाशिवरात्रि यानी भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह का दिन अर्थात भगवान शिव का दिन और महाशिवरात्रि पर भक्तों का भगवान् भोले के मंदिरों में उमड़ना भी स्वाभाविक है, भोले शंकर की ससुराल दक्ष नगरी कनखल में महाशिवरात्रि की धूम है, कनखल में भगवान शिव की ससुराल पौराणिक दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर और हरिद्वार के अन्य सभी शिवालयों में शिव भक्त भगवान शंकर का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे है, सुबह से ही शिव का जलाभिषेक करने के लिए भक्तों का मंदिर में ताता लगा हुआ है और लंबी लंबी कतारें लगी हुई है ,मान्यता है कि पौराणिक नगरी कनखल में भगवान् शंकर की ससुराल में स्थापित शिवलिंग दुनिया का पहला शिवलिंग है और यहां हुआ भगवान शंकर और पार्वती विवाह दुनिया का पहला विवाह था और महाशिवरात्रि पर दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है ,आज ही के दिन भगवान शंकर और पार्वती का विवाह हुआ था और इस दिन को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और आज के दिन जो व्यक्ति दक्षेश्वर महादेव स्थित शिवलिंग का जलाभिषेक करता है उसे अन्य स्थान पर जल चढ़ाने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।
श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज का कहना है कि हर वर्ष में जो प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आती है जिसको शिवरात्रि कहा जाता है फाल्गुन मास में महाशिवरात्रि होती है साल भर में जो चार रात्रि बड़ी आती है पूजा की, उसमें एक दीपावली की रात्रि, होली की रात्रि ,शिवरात्रि और कालरात्रि यानी दुर्गा अष्टमी अश्विन मास, महाशिवरात्रि फाल्गुन मास में आती है उसके बाद ऋतु का परिवर्तन होता है और भगवान शिव के जहां जहां विग्रह हैं जहां-जहां उनके जो भी भक्त पूरे वर्ष पर पूजा नहीं कर पाते महाशिवरात्रि के दिन अगर वह 24 घंटे का व्रत रखकर जागरण करके भगवान शिव का अभिषेक करते हैं उनकी सारी इच्छाएं पूरी होती है भगवान शिव ब्रह्म है जगत के नियंता है पालनकर्त्ता है सभी गुण उनके अंदर जो जैसा जिसकी जैसी भावना उसके अनुसार उसको फल प्राप्त होता है, शिव पुराण के अनुसार अगर हम कहें तो ऐसी कथाएं आती हैं जहां भक्तों ने इसमें एक वैश्या का विवरण आता है एक आदिवासी का आता है किसी ने महाशिवरात्रि को किसी दूसरे कारण से जागरण किया लेकिन भगवान शिव ने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया ,शिवरात्रि का एक अपने आप में बहुत महत्व है ,क्योंकि हमारे यहां जीवन का जो चक्र है वह जीवन के चार भाग है ब्रह्मचर्य, गृहस्थ ,सन्यास अंतिम परिणीति है बीच में आता है वानप्रस्थ ,यह चारों जीवन के आधार पर जब हम बाल्यकाल ,गृहस्थ के पश्चात ब्रह्मचर्य और सन्यास का जीवन जीते हैं प्रत्येक का 25 की आयु का निर्धारण किया गया है, इस भाव से हम को चारों पहर की पूजा करनी चाहिए ,प्रथम पहर में बाल्य रूप में हूं द्वितीय पर में गृहस्थ रूप में हूं तृतीय में वानप्रस्थ और चतुर्थ ।के स्वयं।में शिव स्वरूप में होकर भस्म आरती जिसको हम कहते है महाशिवरात्रि की जो आरती है वह भस्म की होती है और अगर नहीं भी कोई व्यक्ति कर रहा है तो आपके चैनल के माध्यम से मेरी अपील है कि थोड़ा सा सूक्ष्म शरीर पर भस्म धारण करके त्रिपुंड लगाए लेकिन भगवान शिव का पूरा भस्म से सिंगार करके पूजा करें क्योंकि भस्म ही कहते हैं कि वह रूप है जो कभी नष्ट नहीं होती है हम सब का उसी से निर्माण होता है उसी में विलीन हो जाते है यह शाश्वत सत्य है, शिव की ब्रह्म है निराकार रूप में उनका पूजन होता है और साकार रूप में भी होता है शिवलिंग का मतलब होता है जो संसार को अपने अंदर लीन कर ले और जो सबके अंदर लीन हो उसका नाम शिवलिंग है शिवलिंग का मतलब है चिन्ह, ज्योति का मतलब जिस प्रकार से हम दीपक जलते हैं जो लो हैं उसी प्रकार की आकृति हमारी आत्मा का स्वरूप है तो आत्मा का स्वरूप प्रतिबिंब रूप है शिवलिंग इसीलिए शिवलिंग की पूजा का विधान किया गया है सतयुग में पुष्कर ,त्रेता मैं नैमिषारण्य द्वापर में कुरुक्षेत्र कलयुग में हरिद्वार प्रधान तीर्थ है कलयुग में भगवान शिव की ससुराल कनखल में दक्षेश्वर महादेव का जो मंदिर है वह इस संसार का प्रथम शिवलिंग है इसकी आकृति पाताल मुखी है और खास करके जो उत्तर भारत से भक्त यहां कावड़ लेने के लिए आते हैं या दूसरे भाग से यहां पूजा करने आते हैं भगवान उनका सर्वप्रथम गंगा स्नान करके गंगा का अभिषेक करते हैं और जहां कहते हैं कोई कार्य नहीं हो रहा और ससुराल में अगर हम जाते हैं तो काम हो जाता है लोकाचार में यह कहावत है, यह भगवान शिव की ससुराल है तो श्रावण मास में भी भगवान शिव का यहां पर सवा महीना निवास रहता है इसलिए आध्यात्मिक क्षेत्र में भगवान दक्षेश्वर का विशेष महत्व है।
कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक का विशेष महत्व है यही कारण है कि शिवालयों पर स्थानीय ही नहीं बल्कि देश भर से श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं ,इनका मानना है कि इस स्थान पर जलाभिषेक करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और मन को शांति मिलती है और मनोकामनाए पूरी होती है।



महाशिवरात्रि भगवान शंकर और पार्वती केे विवाह के दिन कनखल स्थित दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर में भगवान शंकर का जलाभिषेक करने से उनको फूल धतूरा बेलपत्र आदि चढ़ाने सेेे सभी मनोकामना पूर्ण होती है और इसी को लेकर सुबह से दक्ष प्रजापति ने बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए पहुंचे हुए हैं।

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